22 को कूंडे करना शीओ़ं से मुशाबिहत है
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*🥀 22 को कूंडे करना शीओ़ं से मुशाबिहत है 🥀*
✍️ जो (रजब का) महीना चल रहा है इसकी 22 तारीख़ को इमाम जा'फ़र सादिक़ रह़मतुल्लाहि तआ़ला अ़लैह की फ़ातिह़ा दिलाई जाती है, जो के एक अच्छा काम है, लेकिन चंद सालों से इस छोटे से मसअले को लेकर अ़वाम परेशान है; इसलिए के अब कुछ लोग कहते हैं के 22 रजब को कूंडे करना शीओ़ं से मुशाबिहत है, लिहाज़ा सुन्नी 22 को कूंडे न करें.
जबकि ये कोई ऐसा मसअला नहीं, जिसकी वजह से परेशान हुआ जाए और 22 तारीख़ में फ़ातिह़ा दिलाने की वजह से ख़्वाह म-ख़्वाह सख़्ती की जाए.
बस इतना बता देना काफ़ी है के 22 रजब की बजाए, 15 को फ़ातिह़ा दिलाना बेहतर है, क्योंकि इसी दिन इमाम जा'फ़र सादिक़ रह़मतुल्लाहि तआ़ला अ़लैह का विसाल हुआ था।
रहा शीओ़ं से मुशाबिहत का मसअला, तो जब ह़ुज़ूर ताजुश्-शरीआ़ अ़लैहिर्रह़मा से इस बारे में पूछा गया, तो आपने फ़रमाया:
"ये मुशाबिहत वाली बात जो है, अब यहां पर इस वजह से के शीओ़ं ने 22 तारीख़ को नियाज़ दिलाई, लिहाज़ा ना-जाइज़ है, ये दा'वा सह़ीह़ नहीं है; इसलिए के दुर्रे मुख़्तार में फ़रमाया: कुफ़्फ़ार से तशब्बोह जो है, जो अफ़आ़ले मज़मूमा हैं, जो उनके अफ़आ़ले ख़ास्सा हैं या अफ़आ़ले क़बीहा हैं, उनमें तशब्बोह, ना-जाइज़ है. ये इत्तेफ़ाक़िया त़ौर पर मशाबिहत वाक़ेअ़् हो गई के वो भी नियाज़ दिलाते हैं और सुन्नी भी नियाज़ दिलाते हैं;
अब वो नमाज़ पढ़ते हैं, हम भी नमाज़ पढ़ते हैं, तो क्या इस वजह से नमाज़ ना-जाइज़ हो जाएगी
*📚 ऐप्लिकेशन: ताजुश्-शरीआ़ सवाल व जवाब, 17 जुलाई 2008 मुल्तक़त़न*
ह़कीमुल उम्मत ह़ज़रते मुफ़्ती अह़मद यार ख़ान नई़़मी रह़मतुल्लाहि अ़लैह फ़रमाते हैं:
"22 वीं रजब को इमाम जा'फ़र सादिक़ रद़ियल्लाहु अ़न्हु की फ़ातिह़ा करें, (इसकी बरकत से) बहुत सी अड़ी हुई मुसीबतें टल जाती हैं."
*📚 इस्लामी ज़िंदगी, सफ़ह़ा नं. 133, नाशिर: मक्तबतुल मदीना (हिंद)*
*👉 इस मसअले पर और भी उ़लमा की कुतुब से दलीलें दी जा सकती हैं मगर हम इसी पर बस करते हैं के इसी क़दर काफ़ी है इससे मा'लूम हुआ के किसी भी तारीख़ को कूंडे कर सकते हैं 22 को भी कर सकते हैं और 27 को भी मगर 15 को करना बेहतर है।*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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