हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु08

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*🥀 हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु 🥀* 



*🕋 06*

بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ

आप इन्तिहाई बुलन्द मक़ाम और नेक ख़स्लत थे और सिफ़ाते ज़ाहिरी से आरासता और रोशनिए बात़िन से पैरास्ता थे ग़ुर्बा व मसाकीन के साथ बड़ी दिल जोई के साथ पेश आते थे।
                 
मन्क़ूल है कि एक दिन आप अपने ग़ुलामों के साथ बैठे हुए थे और उनसे क-ह रहे थे कि आओ इस चीज़ का अह़द करें और एक दूसरे के हाथ में हाथ दे कर वाअ़्दा करें कि क़यामत के रोज़ हम्मेसे जो कोई निजात पाए वो बाक़ी सबकी सफ़ाअ़्त करे उन लोगों ने कहां: ऐ इब्ने रसूलुल्लाह आप को हमारी सफ़ाअ़्त की क्या ह़ाजत है इसलिए कि आप के नाना जान तो ख़ुद तमाम मख्लूक़ की शफाअ़त करने वाले हैं तो आप ने फ़रमाया: मुझे शर्म आती है कि अपने आ़माल के साथ क़यामत के दिन अपने नाना जान के सामने जा कर उनसे आंखें चार कर सकूं। {اَللّٰهُ اَکْبَرْ}

हज़रत दाऊद त़ाई (रहमतुल्लाह तआला अलैह) एक मर्तबा आप की ख़िदमत में आए और कहां: ऐ फर्ज़न्नदे रसूले ख़ुदा मुझे कोई नसीह़त फ़रमाईए क्यू की मेरा दिल सियाह हो गया है। तो आप ने इरशाद फ़रमाया ऐ अबू सुलेमान: तू खुद अपने ज़माने का ब्रग़ूज़ीदा ज़ाहिद है तुझे मेरी नसीह़त की क्या ह़ाजत है? हज़रत दाऊद त़ाई ने फ़रमाया: ऐ फ़र्ज़न्नदे रसूलुल्लाह आपको तमाम मख्लूक़ पर बुलन्दी ह़ासिल है और हर किसी को नसीह़त करना आप पर वाजिब है। इमाम जाअ़्फर सादिक़ ने इरशाद फ़रमाया ऐ अबू सुलेमान: मैं इस बात से डरता हूं कि क़यामत के दिन मेरे जद्दे मोह़तरम (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) मेरा गिरेबान पकड़ कर ये पुछने लगें कि तूने ह़क़ मुताबअ़त के अदा करने में कोताही क्यू की? तो मैं क्या जवाब दूंगा? इसलिए कि ये काम रिश्त-ए-सह़ीह़‌ या आ़ली  ख़ानदान पर मुन्ह़सिर नहीं बल्कि इसका ताअ़्लुक़ अच्छे आ़माल से है जो अल्लाह की राह में किये जाएं।
                 
हज़रत दाऊद त़ाई (रहमतुल्लाह तआला अलैह) को इस बात पर रोना आ गया और कहने लगे या खुदा वह शख्स जिसकी त़ीनत आबे नबूवत से मुरक्कब है और जिसकी त़बीअ़त का ख़मिर बुरहान व ह़ुज्जत से उठाया गया है जिसके जद्दे अम्जद पैग़म्बरे ख़ुदा है जिन की वालिदा माजिदा बत़ूल जैसी ख़ातून है इस बात पर इतने फिकर मन्द है तो दाऊद की क्या मजाल जो अपने मुआ़मलात पर नाज़ करे।
                                  
*📚 تزکرہ مشائخ قادریہ رضویہ صفحہ:156*

_✍🏻 बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله_



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