हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु2⃣
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*🥀 हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु 🥀*
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بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*इमामे जअफ़र और मंसूर ख़लीफ़ह*
ख़लीफ़ह मंसूर अब्बासी के बारे मे रिवायत है कि किसी बात पर नाराज़ हो कर उसने अपने सिपाहियों को हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की तलाश में भेजा। नराज़गी ज़्यादह थी क़त्ल की धमकी दे चुका था। हज़रत इमाम जब तशरीफ़ लाये तो उसने तहदीद आमेज़ बातें कीं, और कहा।
अहले इराक़ ने आप को अपना अमीर बनाया है और अपनी जक़ात आप को देते हैं और आप मेरी खिलाफत से बगावत करके फसाद बरपा करना चाहते हैं। ख़ुदा मुझे क़त्ल करे अगर मैं आप को क़त्ल न करूँ।
इमाम मोहतरम ने निहायत मतानत से जवाबन इरशाद फ़रमाया:
अमीरूल मोमिनीन! हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को सलतनत व हुकूमत अता की गयी तो उन्होंने रब तआला का शुक्र अदा फ़रमाया। हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम दुनियावी मुसीबत मे मुब्तिला हुए तो उन्होंने सब्र फरमाया और हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम पर ज़ुल्म व ज्यादती हुई तो उन्होंने अफ़ू व दर गुज़र से काम लिया।
हज़रत के इस कलाम को सुन कर मंसूर का ग़ुस्सह ख़त्म हो गया, तकलीफ़ का ख़्याल तर्क कर दिया, और वह खुश होकर आप की तारीफ़ करने लगा, वहाँ से वापसी पर किसी ने दरयाफ्त किया हुज़ूर! आपने मंसूर के पास जाने से पहले कुछ दुआ फरमायी थी वह दुआ क्या थी?. इरशाद फरमाया वह दुआ यह थी:
*तर्जुमह मुलाहिजा कीजीये:-*
आप ने वालिदे गिरामी से रिवायत किया, कि रसुलूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है।
अल्लाह तआला जिसे कोई निअमत अता फ़रमाये उस पर अल्लाह तआला का शुक्र अदा करना ज़रूरी है, और जिसे रोजी की तंगी हो उसे चाहिए कि अस्तग़फार पढ़े, और जो किसी काम की वजह से रंजीदह व फ़िकर मंद हो उसे चाहिए कि:
_लाहौल वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीइल अज़ीम का विर्द करे।_
*_📚नियाज़ नामा हज़रत इमाम जअफ़र सादिक़ सफह नम्बर 5/6_*
_✍🏻 बाक़ी अगली पोस्ट में..ان شاء الله_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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